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साक्षात्कार

भारत अब पुनर्रचना की बाट जोह रहा है

March 29, 2009

गत ढाई सौ वर्षों में हुए सारे प्रयोग कमोबेश विफल हुए हैं। इन प्रयोगों के परिणामस्वरूप प्रचलन में आई सारी व्यवस्थाएं बंद गली में पहुंच गई हैं या पहुंच रही हैं। समाजनीति, अर्थनीति सहित लगभग सभी व्यवस्थाओं को फिर से गढ़ने की आवश्यकता है। आज निश्चित रूप से भारत पुनर्रचना की बाट जोह रहा है। यह काम केवल सत्ता परिवर्तन से संभव नहीं है। इसके लिए हमें व्यापक धरातल पर प्रयास करना होगा।

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इतिहास का सच और भविष्य की चुनौती है अखंड भारत

January 16, 2009

गत कुछ दिनों से अखंड भारत पर देश भर में काफी चर्चाएं हो रही हैं। इन चर्चाओं में अखंड भारत की व्यावहारिकता, वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता, इसके राजनैतिक स्वरूप, दक्षिण एशिया महासंघ बनाम अखंड भारत जैसे अनेक प्रश्न और बिन्दु सामने आए। इन्हीं प्रश्नों को लेकर भारतीय पक्ष के कार्यकारी संपादक रवि शंकर ने विख्यात विचारक श्री गोविन्दाचार्य से बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके मुख्य अंश।

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भूसांस्कृतिक सत्य है अखंड भारत

January 13, 2009

गत दिनों वरिष्ठ भाजपा नेता श्री लालवृफष्ण आडवाणी ने पाकिस्तान को एक स्थापित सत्य और जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष घोषित किया था। उनके विरोध में गत 17 जून को राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन की ओर से श्री गोविंदाचार्य ने एक प्रेस वक्तव्य जारी किया था। भारतीय पक्ष ने उनसे इस संदर्भ में बातचीत की। प्रस्तुत हैं इसके मुख्य अंश।

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राजनीति भी जरूरी है – के. एन. गोविन्दाचार्य

December 20, 2008

चुनावी राजनीति में शामिल होकर सत्ता हासिल करना राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन का लक्ष्य नहीं है। लेकिन चुनावी राजनीति में शामिल होने वाले समूहों के साथ संवाद स्थापित करना और उन्हें गरीबपरस्त तथा भारतपरस्त नीतियों की ओर प्रेरित करना राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन अपना कर्तव्य मानता है। भारतीय जनशक्ति के साथ सहयोग एवं तालमेल को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। मैं राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन का संयोजक हूं और इसी नाते भारतीय जनशक्ति के साथ अपने संबंध तय करूंगा।

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विश्व व्यापार संगठन में कुशलता नहीं जिद्द चाहिए

March 29, 2004

भारत के 40 करोड़ के बाजार के आधार पर हम दुनिया के लोगों से अपनी शर्तों पर व्यापार कर सकते हैं। इसके लिए मूलभूत आवश्यकता यह है कि हम यह समझें कि दुनिया को भारत की जरूरत ज्यादा है, भारत को दुनिया की जरूरत कम। इस आधार पर हम चलें और अपनी योजनाओं में परिवर्तन करें तो निश्चित रूप से कोई हमारा शोषण नहीं कर सकेगा।

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