September 22, 2009
अभी जिस तरह से सत्ता में बैठे हुए खास लोग सादगी दिखा रहे हैं, वह आम लोगों के लिए बहुत महंगी पड़ रही है। सही मायने में देखा जाए तो सादगी के फेर में खर्च तो ज्यादा ही हो रहा है। दरअसल, जो लोग सादगी की बात करने वाले लोग ही वैसी नीतियों को बढ़ावा देने का काम भी कर रहे हैं जिसकी वजह सादगीपसंद लोगों का जीना मुहाल हो गया है। ये नीतियां तो आम लोगों को मुश्किल में डालने वाली बनाते हैं लेकिन बात सादगी की करती है। ये वही लोग हैं जिन्होंने पूंजीपरस्त और बाजारवादी नीतियां बनाईं।
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July 7, 2009
वर्तमान व्यवस्थाओं में हमें तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के बदलावों के लिए संघर्ष करना होगा। इसलिए सबसे पहले अपने-अपने जिलों का अंदाज, आकलन तो कर ही लें, जिले की जनसंख्या, प्राकृतिक संसाधन, जिले में विकास की मद में आने वाली राशि का हिसाब, जिले के राजस्व और आय का ब्यौरा, जिले का गेजेटियर, जिले की देशज ज्ञान परंपरा, जिले का अनोखापन क्या है, इन सब बातों की जानकारी एकत्रित करें
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